संख्या पद्धति (Number System) गणित का वह आधार है जिसके माध्यम से हम संख्याओं को लिखने, उनके नामकरण और उनकी गणना के नियमों को समझते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC, UPSC, Railway, UPTET) के दृष्टिकोण से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
1. संख्या पद्धति की परिभाषा
संख्याओं को लिखने और उनके नामकरण के सुव्यवस्थित नियमों को संख्या पद्धति कहते हैं। इसमें विभिन्न प्रतीकों (अंकों) का प्रयोग करके किसी भी मान को दर्शाया जाता है।
2. संख्याओं के प्रकार (Types of Numbers)
संख्याओं को उनकी प्रकृति के आधार पर निम्नलिखित श्रेणियों में बाँटा गया है:
- प्राकृतिक संख्याएँ (Natural Numbers): गिनती में उपयोग होने वाली संख्याएँ।
- उदाहरण: 1, 2, 3, 4, ...
- पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers): यदि प्राकृतिक संख्याओं में '0' को भी शामिल कर लिया जाए।
- उदाहरण: 0, 1, 2, 3, ...
- पूर्णांक (Integers): इसमें धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य सभी शामिल होते हैं।
- उदाहरण: ...-3, -2, -1, 0, 1, 2, 3...
- परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers): जिन्हें p/q के रूप में लिखा जा सके (जहाँ q \neq 0)।
- उदाहरण: 3/4, 5, 0.5
- अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers): जिन्हें p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
- उदाहरण: \sqrt{2}, \pi
- सम और विषम संख्याएँ (Even & Odd Numbers): जो 2 से विभाजित हों (सम) और जो न हों (विषम)।
- भाज्य और अभाज्य संख्याएँ (Composite & Prime Numbers): अभाज्य संख्या वह है जिसके केवल दो गुणनखंड हों (1 और स्वयं)।
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